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Maa Shakuntala Gau Sewa Dharmarth Trust

अंग अंग में देवता, बहे दूध की धार || वैतरणी दे पार कर, पूजे सब संसार ||

We are Maa Shakuntala Gau Seva Dharmarth Trust committed to working with a dedicated mission of Cow Protection and Avail people to cow importance to the world.

We know that being humans, we have the luxury of sharing our feelings with others through the use of words and languages, but animals? They just cannot share their agonies and grief and pain and wish! That’s why it is our duty to help them in the best possible way to their lives can become easy whether in night or day.

माँ शकुंतला गौ सेवा धर्मार्थ ट्रस्ट गाय संरक्षण के समर्पित मिशन के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं । हम जानते हैं कि इंसान होने के नाते, हमारे पास शब्दों और भाषाओं के उपयोग के माध्यम से दूसरों के साथ हमारी भावनाओं को साझा करने की लक्जरी है, लेकिन जानवर? वे सिर्फ अपनी पीड़ा और दु: ख और दर्द और इच्छा साझा नहीं कर सकते! यही कारण है कि रात में या दिन में उनके जीवन के सर्वोत्तम संभव तरीके से उनकी मदद करने का हमारा कर्तव्य है।

Come, join in our mission and make it yours too!!
This is what you can do…..

  • Express your love for cow
  • Propagate the virtues of cow
  • Donate to Gaushala
  • Visit a Goshala for regular Goseva yourself
  • Inform us if you see a sick cow or cruelty to cow or its progeny

Help For Gau Sewa

Contact No. 9639566028, 9759051535

Gadhwali Nagar, Khadri Khadakmaaf,
PO. Satyanarayan Mandir
Dehradun Uttarakhand


We Are Social

“गावो विश्वस्य मातर |”

गौमाता जो आजीवन हमें अपने दूध- दही- घी आदि से पोषित करती है| अपने इन सुंदर उपहारों से जीवनभर हमारा हित करती है| ऐसी गौमाता की महानता से अनभिज्ञ होकर मात्र उसके पालन-पोषण का खर्च वहन ना कर पाने के बहाने उन्हें कत्लखानों के हवाले करना विकास का कौन सा मापदंड है ? क्या गौमाता के प्रति हमारा कोई कर्त्तव्य नहीं है ?

’यदि हम गौओं की रक्षा करेंगे तो गौएँ भी हमारी रक्षा करेंगी |’
सदियों से अहिंसा का पुजारी भारतवर्ष आज हिंसक और मांस निर्यातक देश के रूप में उभरता जा रहा है| यह बड़ी विडम्बना है कि एशिया का सबसे बड़ा कत्लखाना अन्य इस्लामिक देशों में नहीं बल्कि भारत के महाराष्ट्र प्रान्त में है, जहाँ हजारों गायें रोज कटती है| दूसरी अल कबीर गोवधशाला आंध्रप्रदेश में है | यहाँ रोज 6 हजार गौएँ , इससे दुगुनी भैसें तथा पड़वे  काटे जाते है| इसका लगभग 20,000 टन मांस विदेशों में निर्यात होता है |

क्या आप जानते हैं जिस गौमाता की आप पूजा करते हैं, उसे किस प्रकार निर्दयतापूर्वक मारा जाता है ?
कत्लखाने में स्वस्थ गौओं को मौत के कुँए में 4 दिन तक भूखा रखा जाता है| अशक्त होकर गिरने पर घसीटते हुए मशीन के पास ले जाकर उन्हें पीट-पीटकर खड़ा किया जाता है| मशीन की एक पुली (मशीन का पकड़नेवाला एक हिस्सा) गाय के पिछले पैरों को जकड़ लेती है | तत्पश्चात खौलता हुआ पानी 5 मिनट तक उस पर गिराया जाता है| पुली पिछले पैरों को ऊपर उठा देती है| जिससे गायें उलटी लटक जाती हैं| फिर इन गायों की आधी गर्दन काट दी जाती है ताकि खून बाहर आ जाये लेकिन गाय मरे नहीं | तत्काल गाय के पेट में एक छेद करके हवा भरी जाती है, जिससे गाय का शरीर फूल जाता है | उसी समय चमड़ा उतारने का कार्य होता है | गर्भवाले पशु का पेट फाड़कर जिन्दा बच्चे को बाहर निकला जाता है | उसके नर्म चमड़े को (काफ-लेदर) को बहुत महंगे दामों में बेचा जाता है|

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